लेखिका: सबीका बतूल, जामिआ अल-मुस्तफ़ा, कराची
हौज़ा न्यूज़ एजेंसी।
इंतज़ार-ए-फ़रज का अर्थ केवल इमाम महदी (अलैहिस्सलाम) के प्रकट होने की प्रतीक्षा करना नहीं है, बल्कि उस दिन के लिए स्वयं को तैयार करना भी है। जब हम दुनिया में अत्याचार, अन्याय, हत्या, हिंसा और शक्तिशाली लोगों द्वारा कमज़ोरों पर ज़ुल्म होते देखते हैं, तो हमें निराश नहीं होना चाहिए। हमें यह विश्वास रखना चाहिए कि ये परिस्थितियाँ हमेशा नहीं रहेंगी। एक दिन अवश्य न्याय और इंसाफ़ पर आधारित शासन स्थापित होगा, क्योंकि असत्य और अत्याचार हमेशा के लिए नहीं टिक सकते।
इंतज़ार का अर्थ निष्क्रिय होकर बैठ जाना नहीं है, बल्कि अत्याचार का विरोध करना, भलाई को फैलाना और बुराई को मिटाने का प्रयास करना है। एक मुसलमान को यह यक़ीन होना चाहिए कि हर समस्या का समाधान है और अल्लाह तआला एक दिन अवश्य राहत प्रदान करेगा।
इंतज़ार एक कर्म है। इसका अर्थ है कि मनुष्य अपने ज्ञान, ईमान, नैतिकता और चरित्र को बेहतर बनाए, हर समय भलाई के कार्यों का प्रयास करे और स्वयं को इमाम महदी (अलैहिस्सलाम) के प्रकट होने के लिए तैयार रखे। पवित्र क़ुरआन में अल्लाह तआला फ़रमाता है—
"निस्संदेह धरती अल्लाह की है। वह अपने बंदों में से जिसे चाहता है उसका वारिस बनाता है, और अंतिम सफलता परहेज़गारों (धर्मनिष्ठ लोगों) के लिए है।"
इस आयत से यह स्पष्ट होता है कि ईमान वाले लोगों को कभी भी अल्लाह की दया और उसकी सहायता से निराश नहीं होना चाहिए।
हमारी ज़िम्मेदारियाँ
- वैचारिक और व्यावहारिक प्रयास
इमाम महदी (अलैहिस्सलाम) के प्रकट होने से पहले हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम अपने समाज में न्याय, भलाई और दीन की शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार करें, ताकि उनके प्रकट होने के लिए एक बेहतर वातावरण तैयार हो सके।
रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि वसल्लम) ने फ़रमाया कि पूर्व दिशा से कुछ लोग उठेंगे, जो इमाम महदी (अलैहिस्सलाम) की हुकूमत के लिए मार्ग प्रशस्त करेंगे।
- इमाम-ए-ज़माना (अलैहिस्सलाम) को याद रखना
हमें हमेशा इमाम महदी (अलैहिस्सलाम) को याद रखना चाहिए, उनके लिए दुआ करनी चाहिए और उनकी शिक्षाओं पर अमल करना चाहिए। यदि हम वास्तव में उनसे प्रेम करते हैं, तो हमें सांसारिक कार्यों में इतना अधिक नहीं उलझ जाना चाहिए कि अपने इमाम को ही भूल जाएँ।
- इमाम महदी (अलैहिस्सलाम) के प्रकट होने की निशानियों और उनके गुणों की पहचान
हर मुसलमान को इमाम महदी (अलैहिस्सलाम) की निशानियों और उनके गुणों का ज्ञान प्राप्त करना चाहिए, ताकि वह झूठे दावेदारों के धोखे में न आए और सत्य को आसानी से पहचान सके।
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